सोनभद्र में यूरेनियम के बड़े भंडार मिलने से देश की परमाणु क्षमता को मिलेगा नया पंख, एटॉमिक सुपरपावर बनने की राह आसान
सोनभद्र: सोनभद्र जिले के चितपहरी जंगल और कुदरी पहाड़ी क्षेत्र में यूरेनियम के संभावित विशाल भंडार की खोज ने देश के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को नई दिशा देने की उम्मीद जगाई है। परमाणु ऊर्जा विभाग की एक विशेषज्ञ टीम ने इस क्षेत्र में वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत खुदाई शुरू कर दी है। प्रारंभिक अध्ययनों से यूरेनियम के बड़े भंडार की मौजूदगी के संकेत मिले हैं। यदि यह खोज सटीक सिद्ध होती है, तो यह भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा स्वतंत्रता और परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। सोनभद्र में 785 टन यूरेनियम ऑक्साइड की मौजूदगी के साक्ष्य मिले हैं। यह क्षेत्र म्योरपुर ब्लॉक के नकटू में आता है। हालांकि, सोनभद्र में इसके अलावा कूदरी, अंजनगिरा के पहाड़ी जंगली क्षेत्र में यूरेनियम की खोज हो रही है। परमाणु खनिज अन्वेषण एवं अनुसंधान निदेशालय (एएमडी) ने इसके अलावा भी 31 ऐसे स्थान की पहचान की है। अगर सर्वे ठीक निकला तो यह भारत सरकार के न्यूक्लियर एनर्जी मिशन के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी।
सोनभद्र, जो उत्तर प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा जिला है और चार राज्यों (मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार) की सीमाओं से घिरा हुआ है, लंबे समय से अपनी खनिज संपदा के लिए चर्चा में रहा है। इस क्षेत्र में पहले सोने, लौह अयस्क, और अन्य खनिजों की खोज हो चुकी है। 2020 में सोन पहाड़ी और हरदी क्षेत्र में लगभग 3,000 टन सोने के भंडार की खबरें आई थीं, हालांकि जीएसआई ने बाद में इसे केवल 160 किलोग्राम तक सीमित बताया था। अब यूरेनियम की खोज ने इस क्षेत्र को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। दुद्धी-म्योरपुर के बीच तीन, आजनगीरा-कुदरी के नजदीक छह, लाखर, बभनी, मुर्राटोला, जौराही, रंपाकूरर क्षेत्रों में छह, रिहंद नदी के किनारे मेजरूत में चार, बीजपुर, नकटु, कुदर, नवाटोला क्षेत्रों में नौ, और कुंडारघाटी (रिहंद से सटी) में बारह ऐसे स्थानों की पहचान हुई है, जहां यूरेनियम अयस्क की प्रचुर मात्रा में उपलब्धता की संभावना है। जिले में खोजे गए यूरेनियम भंडार यू-308 श्रेणी के हैं, जो परमाणु रिएक्टरों में ईंधन के रूप में उपयोग किए जा सकते हैं।
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