बॉम्बे हाई कोर्ट ने रिश्वत मामले में 2 जजों को किया बर्खास्त, पिता को जमानत देने बेटी से मांगे थे 5 लाख रुपये
नई दिल्ली । बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) ने कदाचार के आरोप में निचली अदालत (lower court) के 2 जजों (judges) को बर्खास्त (dismissed) कर दिया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धनंजय निकम और दीवानी न्यायाधीश इरफान शेख को बर्खास्त करने का फैसला अनुशासन समिति की जांच के बाद लिया गया। निकम पर रिश्वतखोरी का आरोप है। एनडीपीएस अधिनियम के तहत मामलों की सुनवाई करने वाले शेख पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने और जांच के दौरान जब्त किए गए नशीले पदार्थों का दुरुपयोग करने का आरोप है। शेख के खिलाफ उच्च न्यायालय में दायर एक याचिका अब भी लंबित है।
उच्च न्यायालय ने दोनों को बर्खास्त करने का शुक्रवार को आदेश दिया। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने धोखाधड़ी के मामले में जमानत देने के लिए 5 लाख रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप में सातारा जिला एवं सत्र न्यायाधीश निकम के खिलाफ मामला दर्ज किया था। निकम ने जनवरी में अग्रिम जमानत के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने दावा किया कि वह निर्दोष हैं और उन्हें मामले में फंसाया गया है। एचसी ने उन्हें अग्रिम जमानत देने से मार्च में इनकार कर दिया था।
सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा
एक महिला की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसके अनुसार, सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर एक व्यक्ति के साथ धोखाधड़ी करने के आरोप में उसके पिता को न्यायिक हिरासत में रखा गया है। महिला ने बताया कि उसके पिता को जमानत देने से निचली अदालत के इनकार के बाद उसने सातारा सत्र न्यायालय में जमानत के लिए याचिका दायर की थी और निकम ने याचिका पर सुनवाई की थी।
5 लाख रुपये मांगने का आरोप
एसीबी ने आरोप लगाया कि निकम के कहने पर मुंबई निवासी किशोर संभाजी खरात और सातारा निवासी आनंद मोहन खरात ने जमानत मंजूर करने के लिए महिला से 5 लाख रुपये मांगे थे। जांच एजेंसी ने दावा किया कि 3 से 9 दिसंबर 2024 के बीच की गई उसकी जांच के दौरान रिश्वत मांगे जाने की पुष्टि हुई। एसीबी ने निकम, संभाजी खरात, मोहन खरात और एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है।
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