तमिलनाडु में पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम, कई टेंडर कैंसिल
चेन्नई । तमिलनाडु में प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सुदृढ़ बनाने की दिशा में नवगठित सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय की अगुवाई वाले प्रशासन ने अलग-अलग सरकारी महकमों द्वारा जारी किए गए 100 से अधिक 'शॉर्ट-टर्म टेंडर' (कम अवधि वाले टेंडर) को निरस्त कर दिया है। इस कार्रवाई की जद में लोक निर्माण, विद्युत, ग्रामीण विकास और नगर प्रशासन जैसे कई मुख्य विभाग आए हैं। सरकार का मुख्य उद्देश्य सरकारी कामकाज के तरीकों को और ज्यादा जवाबदेह बनाना है।
आपातकालीन टेंडर नीति पर सरकार का सख्त रुख
सामान्य तौर पर 'शॉर्ट-टर्म टेंडर' बेहद जरूरी या आपातकालीन हालातों में ही लाए जाते हैं, ताकि औपचारिकताएं जल्दी पूरी कर काम को तुरंत शुरू किया जा सके। इसमें कंपनियों को बोली लगाने के लिए बहुत कम समय मिलता है। हालांकि, 'तमिलगा वेट्री कजगम' (TVK) सरकार ने कार्यभार संभालते ही यह स्पष्ट कर दिया था कि बेहद असाधारण परिस्थितियों के अलावा इस विकल्प का उपयोग नहीं किया जाएगा। इसी नियम के तहत सरकार ने हाल ही में जारी हुए कम समय वाले टेंडरों की बारीकी से समीक्षा शुरू की है।
इन प्रमुख विभागों के ठेके किए गए वापस
प्रशासनिक समीक्षा के बाद पिछले कुछ हफ्तों के भीतर जारी हुए तमाम टेंडरों को वापस ले लिया गया है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, 13 मई से 22 मई के बीच विभिन्न विभागों द्वारा निकाले गए टेंडरों को चिन्हित कर उन्हें रद्द करने की प्रक्रिया पूरी की गई। इस कार्रवाई से प्रभावित होने वाले महकमों में चेन्नई कॉर्पोरेशन, लोक निर्माण विभाग (PWD), परिवहन, ग्रामीण विकास, बिजली विभाग, जल आपूर्ति और नगर प्रशासन शामिल हैं। इस पूरी प्रक्रिया को अधिकारियों ने एक प्रशासनिक सुधारात्मक कदम बताया है।
लापरवाही बरतने वाले अफसरों पर गिरी निलंबन की गाज
नियमों को ताक पर रखकर काम करने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। चेन्नई कॉर्पोरेशन और ग्रामीण विकास विभाग के जिन अधिकारियों ने स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बावजूद शॉर्ट-टर्म टेंडर की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया था, उन्हें सस्पेंड (निलंबित) कर दिया गया है। इस कार्रवाई के जरिए शासन ने संदेश दिया है कि टेंडर और खरीद से जुड़े नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस कदम का उद्देश्य सरकारी खजाने के खर्च को पारदर्शी बनाना और ठेकों के आवंटन में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना है।
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